मनुष्योचितता से परिपूर्ण वैचारिकता के कवि : कुँवर नारायण
“मैं तुम्हारे साथ हूँ /उस स्वप्न में / जो तुम्हारा है। / हमारा है। / सिर्फ मेरा नहीं!” कुँवर नारायण
समकालीन समाज, साहित्य, इतिहास, दर्शन और जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों\विषयों पर हिंदी कथ्य का लेख/संपादकीय संबंधी उपक्रम।
“मैं तुम्हारे साथ हूँ /उस स्वप्न में / जो तुम्हारा है। / हमारा है। / सिर्फ मेरा नहीं!” कुँवर नारायण
एक वो समय था जब किसी किताब तक पहुँचने के लिए पुस्तकालय का रास्ता पकड़ना पड़ता था या फिर काफी