आग के भीतर खड़ा एक मन!
दिया बुझ गया और,जल उठे हमदिये का बुझना उसकी नियति थीऔर जलना हमारीपर एक रोज कोई आएगादिये को नई बाती
हिंदी की चुनिंदा कविताएँ और नए रचनाकारों की आवाजें।
दिया बुझ गया और,जल उठे हमदिये का बुझना उसकी नियति थीऔर जलना हमारीपर एक रोज कोई आएगादिये को नई बाती
खिड़की से आती धूपजहाँ जहाँ पड़ती हैवहां महसूस होती है एक गहरी चुभनचुभन जो खुरेच कर लाती है अपार पीड़ाजो
ऋचाओं से जातक कथाओं तक, फिर भ्रंश होकर बही हो तुम; हो किसी पर्वत के पिघलने की कहानी, यानी इक